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02.07.2009
 

आधुनिक अर्जुन
सूरज तिवारी ’मलय’


अपने शिष्यों की परीक्षा लेने के लिए भारत के एक आधुनिक गुरुकुल के आचार्य  ने वही पुराना तरीका अपनाया, जो तरीका महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य ने अपनाया था। उसने भी वृक्ष के उपर एक चिड़िया रखी और उसकी आँख में बाण मारने के लिए शिष्यों को एकत्रित किया। बाण संधान करने  के पूर्व शिष्यों से उसने वही पुराना प्रश्न किया कि वृक्ष में तुम्हें क्या क्या दिखाई पड़ रहा है। अनेक शिष्यों ने वृक्ष के तने, पत्ते चिड़िया, उसकी आँख संपूर्ण पीछे का भाग आदि दिखने की बात बताई। तो गुरुजी ने बाण का संधान करने से मना कर दिया, क्योंकि उसे पता था कि जब तक सिर्फ लक्ष्य में दृष्टि न हो तो लक्ष्य भेद कर पाना अत्यंत कठिन है। और जब शिष्य समूह में उपस्थित एक आधुनिक अर्जुन की बारी आई तो जैसे ही उसने धनुष बाण हाथ में लिया उसे वह घटना याद हो आई कि कैसे उसी गुरुकुल के आचार्य ने एक दिन सारे विद्यार्थियों के आगे उसको अपमानित किया था। उसका मस्तिष्क विचलित हो गया। जैसे ही आचार्य ने लक्ष्य भेदने को कहा, उसने लक्ष्य पर बाण का संधान कर दिया। लेकिन यह क्या? लक्ष्य चिड़िया की आँख नहीं बल्कि उसी आचार्य की आँखें थीं।


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