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| परिचय | |||||
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| नाम : |
सूरज प्रकाश |
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श्री सूरज प्रकाश का जन्म देहरादून में 14मार्च, 1952 को हुआ। विधिवत लेखन प्रक्रिया 1987 से आरम्भ किया। अभी तक दो उपन्यास- हादसों के बीच(1998) और देस बिराना(2002) में लिखे हैं। कहानी संग्रह ‘अधूरी तस्वीर’ 1992 में लिखा और गुजरात साहित्य अकादमी द्वारा प्रथम पुरस्कार से सम्मानित हुआ। 1995 में गुजराती में कहानी संग्रह ‘साचा सरनामे’ प्रकाशित हुआ। 2002 में कहानी संग्रह ‘छूटे हुए घर’ और व्यंग्य संग्रह ‘ज़रा संभल के चलो’ प्रकाशित हुआ।
श्री सूरज
प्रकाश ने कई पुस्तकों का अनुवाद भी किया है। जिनमें गुजराती से हिन्दी में
अनुवादित पुस्तकें
‘प्रकाशनो
पडछायो’
(दिनकर
जोशी) का
‘उजाले
की परछाई’;
गिजुभाई की विश्वप्रसिद्ध पुस्तक
‘दिवास्वप्न’
तथा
‘माँ बाप से’;
उनकी ही बारह बाल कथा पुस्तकों का अनुवाद;
विनोद
भट्ट
की
तीन व्यंग्य पुस्तकों -
‘भूल
चूक लेनी देनी’,
‘एँटन
चेखव’
तथा
‘बर्नार्ड
शॉ’
सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त
अंग्रेज़ी की पुस्तकों- एनिमल फ़ॉर्म (जार्ज
ऑर्विल);
क्रानिकल ऑफ़
ए डैथ
फ़ोरटोल्ड (गैब्रियल गार्सिया), एन फ्रैंक की डायरी और चार्ली चेप्लिन की
आत्म कथा का अनुवाद भी किया है। इसके अलावा स्टीफन ज़्विग,
कॉरेल चॉपे,
फ्रैंक काफ्का,
आल्बेयर कामू और ऑस्कर वाइल्ड जैसे विश्व प्रसिद्ध कथाकारों की कई कहानियों
के अनुवाद विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।
श्री सूरज
प्रकाश ने
1999
में बंबई पर आधारित कहानियों के एक विशिष्ट संग्रह
“बंबई”
का और
2001 में लंदन में लिखी जा रही कहाननियों के संग्रह
“कथा
लंदन”
का
सम्पादन भी किया।
श्री सूरज
प्रकाश
1992
में
“अधूरी तस्वीर”
के लिये गुजरात साहित्य अकादमी और
“हादसों
के बीच”
के
लिये महाराष्ट्र राज्य हिन्दी अकादमी के प्रेमचंद कथा सम्मान से सम्मानित
किय गये हैं। श्री सूरज प्रकाश की कहानी संग्रह कई विश्वविद्यालयों में
शोधपत्रों के विषय हैं। |
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