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| परिचय | |||||
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| नाम : |
सुप्रणीति वरेण्या |
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लेखिका व कवयित्री
सुप्रणीति वरेण्या का जन्म 1986 में पुणे में हुआ। आरंभ से ही उनका रुझान
कला, संस्कृति, साहित्य व दर्शन की ओर रहा । पारिवारिक परिवेश व संस्कारों
के प्रभाव से सुप्रणीति ने प्राईमरी पार करने से पूर्व ही कविता रचना को
लिखित रूप देना शुरु कर दिया था व लगभग 6 वर्ष की आयु में सार्वजनिक रूप
में तत्क्षण निर्मित अपनी मृत्यु विषयक रचना से सब को चौंका दिया था। हिंदी
व अंग्रेजी में उनकी कविताऑं का आकाशवाणी से प्रसारण भी हो चुका है।
उन्होंने भरतनाट्यम् व कथक कलाक्षेत्र (चेन्नई) व गंधर्व यूनिवर्सिटी,
मुंबई से प्राप्त किया है। अभिनय के क्षेत्र में सुप्रणीति थियेटर व फ़िल्म
दोनों से किशोरावस्था से जुडी़ हैं। 2005 में उन्हें स्वलिखित,
स्वनिर्देशित व अभिनीत फ़्रेन्च कॉमेडी के लिए राष्ट्रीय स्तर का
सर्वश्रेष्ठ निदेशक का पुरस्कार भी फ़्रांस दूतावास द्वारा मिल चुका है।
उन्होंने ’पीज़ एंड कैरेट्स’ तथा ’मी मीरा’ (सर्वश्रेष्ठ प्रयोगधर्मी
फ़िल्म,लोकप्रिय श्रेणी, पुरी अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्मोत्सव) जैसी प्रयोगधर्मी
अंग्रेज़ी फ़िल्मों में विद्रोही स्त्री की मुख्यभूमिका के लिए देश-विदेश में
भूरि-भूरि प्रशंसा प्राप्त की है। नॉर्वे,जर्मनी व इंग्लैंड में प्रवास कर चुकी सुप्रणीति हिंदी, अंग्रेज़ी, संस्कृत, फ़्रेंच, पंजाबी, तमिल और नॉर्वेजियन आदि भाषाओं पर अधिकार रखती हैं। फ़्रेंच में तो उन्होंने ’अलियान्स फ़्रॉन्सेज़’ में उच्च अध्ययन किया ही है। ’एशियन डेवलपमेंट बैंक’ के 39 वें वार्षिक अधिवेशन (हैदराबाद) में उन्हें फ़्रांस के वित्त- मंत्री के भाषण व घोषणाओं की आधिकारिक दुभाषिया होने का गौरव भी प्राप्त है। इसी प्राकार बैंग्लोर में सम्पन्न अंतर्राष्ट्रीय वेद विज्ञान अधिवेशन (2004) में "ट्रिनिटी ऑफ़ गोड, स्पिरिट एंड मैटर" पर शोधपत्र प्रस्तुत करने वाली वे सबसे कम उम्र की प्रतिनिधि थीं । ग्लास्गो यूनिवर्सिटी (यू.के.) से मानव संसाधन प्रबंधन में एम.एस.सी. तक अध्ययन कर चुकी सुप्रणीति वर्तमान में हैलिफ़ैक्स बैंक ऑफ़ स्कॉटलैंड (यू.के.) में ग्राहक-सेवा के प्रशासक का कार्य कर रही हैं। साथ ही आवाज़ रेडियो पर दार्शनिक-परिचर्चा के कार्यक्रम की प्रस्तुतकर्ता भी हैं। इन दिनों वे एक अन्य स्वलिखित, स्वनिदेशित अंग्रेज़ी फ़िल्म के अभिनय व संपादन के कार्य में भी व्यस्त हैं। सामाजिक-सांस्कृतिक क्रिया-कलापों से निरंतर संबद्ध सुप्रणीति वरेण्या की भारतीय संस्कृति व दर्शन के साथ-साथ स्त्री-विमर्श जैसे क्षेत्रों में लेखन के प्रति विशेष रुचि है। जुलाई 2007 में सुप्रणीति वरेण्या को "यूनिवर्सल पीस फ़ेडेरेशन" के ’एम्बैसेडर ऑफ़ पीस’ के रूप में मनोनीत किया गया है। |
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