हक़ सुनीता ठाकुर
उसने कहा—भूख? मैंने कहा—रोटी उसने कहा—प्यास? मैंने कहा—पानी? उसने कहा—नींद? मैंने कहा— सेज उसने कहा—थकान? मैंने कहा— गोद
उसके हर सवाल पर मैंने दिया—जवाब मेरे एक सवाल पर वो खामोश है आज तक मैंने कहा था— हक़? और लगता है— वो बोलना भूल गया....