एक बीज सुनीता ठाकुर
धरती की कोख में रोपकर एक बीज हम माँगेंगे आकाश से एक बूँद एक दाना ऐसा जो भर सके करोड़ों का पेट भरपेट। जो हो अपना जिसके गर्भ से आती हो मिट्टी की गंध अपनी सी।