अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
03.22.2008
 

एक बीज
सुनीता ठाकुर


धरती की कोख में
रोपकर एक बीज
हम माँगेंगे आकाश से
एक बूँद
एक दाना ऐसा जो भर सके करोड़ों का पेट
भरपेट।
जो हो अपना
जिसके गर्भ से
आती हो
मिट्टी की गंध अपनी सी।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें