आस्तीनों मे साँप हैं ज़हर पचाना सीखिए सुनीता ठाकुर
आस्तीनों मे साँप हैं ज़हर पचाना सीखिए विश्वास के काबिलों में विश्वास बचाना सीखिए वो ख़ामोश हो जाए हैं मेरी बेबाकी से ज़माना जताए है, ख़ामोश हो जाना सीखिए सुर्ख़ आँखों में फ़ख़्र धरना दे बैठी थकी हुई नींद में ख़्वाब जगाना सीखिए हूक सी सीने में उठने मत दीजिएगा सीनों पे पत्थरों के शहर उगाना सीखिए साँसों पर बोझ बनने लगे ज़िन्दगी जब ख़ुदी से बेख़ुदी की क़समें खाना सीखिए।