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ISSN 2292-9754

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09.26.2014


आ गया फिर से चुनाव

अब पाँच साल गुज़र गये
आ गया फिर से चुनाव
अब शायद नेता फिर से बनेंगे
भिखारी भिखारी भिखारी॥

अब देखो तलवे भी चाटेंगे
सच पैरों तले गिड़गिड़ायेंगे
ख़ुद को सेवक और कहे राजा
जनता जनता जनता॥

नादान जनता चुनती इनको
बाद में देखे हाल ही उलटा
भिखारी बनते हैं राजा सब देखे
तमाशा तमाशा तमाशा॥

पूछें ऐसा क्यों वक्त का नजारा
जनता के पास नहीं है जवाब
भिखारी नहीं बोलेंगे अब वे हैं
शासक शासक शासक॥

अब वे इतने ईमानदार हैं यारो
सबकुछ निगलकर ऐसे खड़े हैं
तोंद हाथी सा अब पाँच साल सोयेंगे
कुंभकर्ण कुंभकर्ण कुंभकर्ण॥

अब फिर से वही रट लगायेंगे
गिड़गिड़ायेंगे रोयेंगे हम सहेंगे
बेहतर है अब दिखा दे अंतिम
संसार संसार संसार॥


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