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ISSN 2292-9754

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02.06.2018


तरस

तुझसे बात करने को
तू मनाए मुझे इसलिए
तुझसे नाराज़ होने को
मैं हर पल तरसती हूँ

मेरी साँसों से -
तेरी साँसों की ख़ुशबू...
हर साँस आती रहे
मेरे अधरों पर इसलिए
तेरे अधरों के भार को
मैं हर दिन तरसती हूँ

ये सोच-सोच
रात-रात मुझे नींद नहीं आती
सुकून से सो पाऊँ इसलिए
तेरे हाथ के सिरहाने को
मैं हर रात तरसती हूँ ....

तू ये सब मुझसे कह दे
मैं रात दिन हरपल तरसता हूँ.......


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