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02.22.2014


वो बूढ़ा 

अब भी अपना ठेला लिए
आ जाता है
मेरे शहर के एक
लुप्त हो चुके ढूंढा मेले के दिन
मानो, श्रद्धांजलि देने आया हो।


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