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02.16.2009
 

वो बूढ़ा 
सुनील गज्जाणी


अब भी अपना ठेला लिए
जाता है
मेरे शहर के एक
लुप्त हो चुके ढूंढा मेले के दिन
मानो, श्रद्धांजलि देने आया हो।


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