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03.15.2009
 

एक लम्बी बारिश
सुनील गज्जाणी


झूमता,
गाता,
नाचता,
वो बूढ़ा लोगों की परवाह किए बिना
जनता घूर घूर देखती उसे
पगला गया,
मति मारी गई
कहते गली मोहल्ले वाले उसे
बे-परवाह मस्त अपनी ही धुन में
सड़को पे भरे पानी में कागज़ की नाव चलाता
भरे गड्ढों में उछल-कूद
अठखेलियाँ करता
मानो, बचपना ले आयी उसका
एक लम्बी बारिश


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