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01.30.2009
 

6 छोटी कविताएँ
सुनील गज्जाणी


1
दो बून्द,
चरणों में तेरे,
चढ़ा दी तो,
क्या हुआ,
आँखों का पानी
ही तो है।

2
औरत
एक पुल
दो ख़ानदानों के बीच।

3
मन,
मानो
कस्तूरी मृग हो।

4
मार्ग,
जीवन के भीतर,
मार्ग,
जीवन के बाहर भी।

5
रिश्ते,
सागर की भाँति भी,
रिश्ते,
गड्ढे के पानी जैसे भी।

6
रेखाएँ,
जीवन और जीवन,
के बाहर का,
ख़ास व्याकरण।


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