सुमीता प्रवीण

कविता
एक पूरी दुनिया है औरत
जमीं रहें अपनी जड़ों से औरतें
मुम्बई की बस में
मेनोपॉज़
समीक्षा
ताज़ी बयार चली तो है.
साक्षात्कार
'प्रेम एक स्थायी भाव और अनिवार्य जीवन-शर्त है' - डॉ. दामोदर खड़से