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ISSN 2292-9754

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04.01.2015


यात्रा

मैं अपने घोड़े पर सवार,
हिमतुंगों का सर झुकाना चाहता हूँ,
भूल गया हूँ कि
इन चोटियों पर विजय पाने के लिए
पैदल चलना पड़ता है
कदम ब कदम

भूल गया हूँ कि
पथरीले रास्तों पर पदचिह्न नहीं होते
हर एक को खोजना होता है अपना मार्ग
नुकीले पत्थरों पर चढ़ाना होता है
अपने छिले तलवों का अर्घ्य


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