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ISSN 2292-9754

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04.01.2015


त्रिशंकु

भूत भूलता नहीं है
वर्तमान पहचानता नहीं है
भविष्य जानता नहीं है
इस त्रिशंकु में रहूँगा तो कब तक

एक पाँव वहाँ की
स्मृतियों में अटका है
दूसरा यहाँ की
वास्तविकता में
दो नावों में धरे हैं पाँव
निश्चित है डूबना
तो फिर...
जल में पदचिह्न छोड़ोगे तो कैसे ...!!


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