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05.03.2012
 
प्रकाश दिवस
सुमन कुमार घई

पतझड़ में दीवाली हुई, बर्फ़ फाग उड़ाया आप
बसे परदेस स्वयं तुम, मत आलापो अब अपलाप

दीप्त दिया द्वार पे, फैलाता प्रकाश संदेश
फैले प्रकाश एक सा, जाने न देस परदेस

हृदय प्रेम ज्योति जले, हो प्रकाश दिन रात
हर दिवस पावन हुआ, दीपावली बनी हर रात

यह उत्सव है प्रकाश का, जगाये हर जी में आस
कल फिर नई सुबह है, कट चली रात निराश

वासना जले अहम्‌ बाती संग, तब हो ज्ञान प्रकाश
ऐसा दीप जलाओ इस बरस, जागे जग में नई आस


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