अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
05.03.2012
 
खो चुका परिचय
सुमन कुमार घई

कल्पना की झील में
वास्तविकता की उफनती
लहरों पर
भावनाओं की डोलती नाव
और मैं किनारा ढूँढता हूँ

लालसा के जंगल में
कुंठा की दलदल
धँसता हुआ
मेरा अस्तित्व
और मैं तिनके का सहारा ढूँढता हूँ

जीवन के मरु में
बीते क्षणों की मरीचिकायें
भागता हुआ
दिशाहीन बदहवास साया
और मैं लौटने का रास्ता ढूँढता हूँ

अनजाने से देश में
मुखौटों की भीड़
कोलाहल में खो चुका
अपना ही परिचय
और मैं दर्पण में अपना चेहरा ढूँढता हूँ


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें