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05.03.2012
 
प्रेम-लगन
सुमन कुमार घई

शीतल जल, लगाए अगन
बीती रात का सुखद मिलन
मधुर स्मृति, तुम्हारी सजन

तुम्हारी गंध भरी पवन
भरूँ अंक में हो प्रेम मगन
तुम्हारे उष्ण श्वासों की सरगम
अभी तक गुंजित है अन्तर्मन

प्रेम विह्वल हो मेरा मन
ढूँढे तुम्हें मदमाता यौवन
बस एक लगन बस एक लगन
प्रिय भोगूँ फिर तुम्हारी छुअन

शीतल जल, लगाए अगन
बीती रात का सुखद मिलन
मधुर स्मृति, तुम्हारी सजन

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