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ISSN 2292-9754

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11.17.2014


माँ

माँ को देखने की चाहत में,
पिता रोड़ा लगाते हैं,
जिसकी जिस्म से था हुआ जन्म मेरा,
उसको अपनी सम्पति बताते हैं।
अब किससे दुःख बयां करूँ अपना
सपने में तो माँ रोज़ आती है।
दुआ करता हूँ उन सबके लिए मैं
जिनके आस पास हरदम उनकी माँ होती है।


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