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ISSN 2292-9754

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12.02.2014


कवि प्रसाद

माँगोगे कवि से जो तुम अच्छी सी कविताएँ
सुनाने को नहीं गुनने को वह सुनाएगा
सारा संसार तब झूम कर रह जायेगा
कलियाँ बोल उठेंगी फूल मुस्करायेगा
गीतों के उससे
हर उजड़ा चमन बस जायेगा
दुखों में डूबा चेहरा खिल जायेगा
पतझड़ सावन में बदल जायेगा
दुआओं से तुम्हारी
उसका मन
पास पड़ोस भी
खुश हो जायेगा


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