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ISSN 2292-9754

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01.01.2016


दु:खानुभव

 जब तन दुखता है
तो मन भी दुखता है
जब मन में कोई पीर
तन भी कटे वृक्ष सा
गिर पड़ता है
दोनों में ऐसी अन्त: पैथी
स्वजन परिजन में क्या होगी
वह देखो
खड़े नीम के पत्तों की आँखें
सुबह को चुपचाप टपकती हैं।


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