सुधेश

कविता
एक जिज्ञासा
एकान्त चाहिये
कुछ नये मुक्तक
चाय के प्याले में तूफ़ान
जीवन का यथार्थ
दु:ख
दु:खानुभव
भूल जाओ
सभ्य चेहरे
सुखी दुखी
हर एक दिन - मुक्तक
हर जगह अनुपस्थित