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03.14.2008
 
सुबह की धूप
डॉ. सुधा ओम ढींगरा

चाँदी रंग में रँगी हुई है यह सुबह की धू
                    जीवन में उमंग जगाए यह सुबह की धूप!
गर्मी में लागे इसका ऐसा रूप निराला
                    पसीने से सराबोर करे यह सुबह की धूप!
साँस न आए जी घबराए हर पल जाने कैसे
                 फूल पत्तियाँ सब कुम्हलाए यह सुबह की धूप!
सबको यह परेशान करे क्या पशु क्या पक्षी
                लेकिन फसलों को महकाए यह सुबह की धूप!
गर्मी में सब दूर भागते सर्दी में पास बुलाते
                   क्या-क्या रंग दिखाए है यह सुबह की धूप!
इसके आँचल में जो बैठे माँ सा प्यार पाए
                  ठिठुरन सबकी दूर भगाए यह सुबह की धूप!
कभी गर्मी, कभी सर्दी, कभी पतझड़, मधुमास
                    क्या-क्या रंग बदले है यह सुबह की धूप!
न कोई इसका दुश्मन जग में न कोई इसका यार
                सब पर अपना प्यार लुटाए यह सुबह की धूप!


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