तुम्हें शिकवा था मैं कुछ नहीं कहती मुझे गिला था तुम कुछ नहीं सुनते इन्हीं शिकवे शिकायतों में हम आगे निकल गये .. उम्र पीछे रह गई..
अब तुम सुनना चाहते हो पर मैं कहना नहीं चाहती कल मुझे तुम्हारी ज़रूरत थी आज तुम्हें मेरी
ज़रूरतों से आगे भावनायें संवेग दिल है जिसकी क़द्र तुमने नहीं की समय निकलता गया और मैं बदलती गई आज तुम मुझे सुनना चाहते हो और मैं कुछ भी कहना नहीं चाहती