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10.04.2007
 
नेक दिल
डॉ. सुधा ओम ढींगरा

वह,
एक नेक दिल इन्सान था,
लोगों के लिए भगवान था।
जिसने अपना
सब कुछ लुटाया
ख़ुद को मिटाया
कि
देश आज़ाद हो सके!
आने वाली पीढ़ी
सुख की साँस ले सके!
उसकी कुर्बानी रंग लाई....
देश आज़ाद हुआ
लेकिन वह कल की बात हुआ!
समय के साथ-साथ
जब उसका ध्यान आया
तो
लोगों का मन
बहुत झुँझलाया
तब – झट से
किसी कंकर, पत्थर की सड़क पर
उसका नाम लिखाया,
किसी चौराहे पर
उसका बुत लगवाया
लेकिन
उसके विचारों को
उसके आदर्शों को
सीधा श्मशान पहुँचाया
और
गहर में दफ़नाया।


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