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| 04.28.2007 |
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नन्हा बच्चा सुधा कंसल |
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नन्हा बच्चा है, इक चिड़िया, रिसता वह ज़ख़्म, बन जाता
नासूर, ऐसे ही यह चलता चक्र नन्हा बच्चा है, इक चिड़िया, |
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