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04.28.2007
 
मजदूर माँ
सुधा कंसल

पेट में ही कुनमुनाते मेरे लाल
यही नौ महीने तेरे जीने का है आधार,
मार ले तू कितने हाथ-पैर
यही है तेरा संसार

जब तू निकलेगा बाहर होगा हैरान,
अन्दर से ज़्यादा, ये कोठरी है विरान,
भूख लगने पर दूध नहीं,
खून का क़तरा मिलता है अन्दर
पर यहाँ तो माँ के सूखे स्तनों को,
चूसने का है काम,

चारों तरफ़ है, धूप ही धूप,
और तेरी माँ को है, काम ही काम
पेट में नौ महीने तूने मेरे साथ हैं, पत्थर तोड़े
पर अब कैसे रखूँ साथ -
तेरी माँ इस बात पर है परेशान

तुझे देख मुझे कोई देता नहीं है काम
अब तू हो गया बीस दिन का जवान,
अपनी जवानी और मेरे बुढ़ापे पर तरस खा,
चल उठ, मेरे साथ पत्थर तुड़वा॥

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