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| 04.28.2007 |
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क्यों ना जीवन से प्यार करूँ सुधा कंसल |
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मैं क्यों ना जीवन से प्यार करूँ धूप खिली हो जब कोमल सी रास्ता जब हो कोई दिखाने वाला, चचहाते हों पक्षी, मंदिर की बजा जाए घंटी मैं क्यों ना जीवन से प्यार करूँ |
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