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ISSN 2292-9754

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07.02.2014


लघु कविताएँ ; ‘एक काफिला नन्हीं नौकाओं का’

1- सिर्फ़ एक धुन
उदासी में डूबी सुबह
उदासी में भीगी शाम
उदासी का जाम
जिन्दगी की बाँसुरी पर
सिर्फ़ एक धुन
बजती हैं –
एSS क तेरा नाम ।
-0-
-2 तपिश और आग
दिल के आतिशदान में
चटख़ती यादों !
तपिश तो ठीक है, सही जाएगी
उफ़ ! आग ऐसी ।
मत बनो बेरहम इतनी
मेरी दुनिया जल ही जाएगी !
-0-
3-दो पल में
कहाँ- कहाँ हो आया मन
दो पला में
क्या- क्या पाया
खो आया मन
दो पल में …
4- इंतज़ार
-0-
इंतज़ार
इंतज़ार ---
पलकों पर काँपते
आँसुओं की बन्दनवार
कि / पुतली की रोशनी में
झिलमिलाते /दीयों की क़तार ----
-0-
5---दस्तक
स्वीटपीज़ की गंध
धीमे – धीमे/ हवा पर बैठ
सरसराती/ आती हैं
कोई महक भरी याद
हौले –हौले
मेरे दिल का दरवाज़ा
थपथपाती हैं –
न, नहीं खोलूँगी !
6—फाँस
बदल गया मौसम
फूल गए
अमलतास
करक गई / ज़ोर से
फिर कोई फाँस…
-0-
7---चोट
सुबह-सवेरे
कोयल बोली / कहाँ पी का गाँव
मौसम-बहेलिया
मँजे खिलाड़ी-सा
फेंक गया दाँव
टप से गिरी मैं
चोट खाई चिड़िया-सी
बाज़ी फिर
उसके हाथ रहेगी !!
-0-
8--मृग- जल
हौले –से
तुमने/ तपता मेरा हाथ
छुआ, और पूछा -
‘अब कैसी हो?’
----झपकी आई थी !
-0-
9-सान्त्वना
फूल
मुझे बहलाने आए—
मेरे पास बैठ कर
हिचकी भर-भर
रोने लगे …
-0-
10- सिसकी
बहुत देर रो –रो कर
हलकान हो-हो कर
सो जाए/ कोई बच्चा
काँधे लग कर
तो/ नींद में
जैसे बार- बार
उसे सिस की आती है,
ऐसे
मुझे तेरी याद आती है…।
-0-
11---बुज़दिल
दहकती टहनियाँ
गुलमौर की
‘आग किसने लगाई’
फुस फुसाया जा रहा है,
सवाल
जंगल में कई दिन से
बुझाने
कोई आगे नहीं आता ।
-0-
12 -- औचक ही
गुज़रे सबेरों की
किताब
का कोई पन्ना खुल गया
जनवरी की अलस्सुबह
ठण्डे पानी से नहा कर
निकलने पर
पूरी रफ्तार से / चलते
छत-पंखे के नीचे
औचक ही
आ गया तन –मन…
-0-
13-मिट्टी का दिया
मैं / मिट्टी का दीया
बड़ी मेहरबानी!
इस दीवाली
तुमने जला दिया
और / यूँ / अपना
जश्न मना लिया …


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