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| 02.16.2009 |
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दिवा स्वप्न : गिजू भाई बधेका |
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दिवा
स्वप्न : गिजू भाई बधेका
(हिन्दी में प्रथम संस्करण,
मूल
गुजराती में 1932)
हिन्दी अनुवाद : काशिनाथ त्रिवेदी
प्रकाशक : नेशनल बुक ट्रस्ट,
इंडिया
मूल्य: 25 रुपए
पृष्ठ
संख्या: 86
यह पुस्तक
चार खण्डों में विभाजित है:-
1.
प्रयोग का
प्रारम्भ
2.
प्रयोग की
प्रगति
3.
छह महीने
के अन्त में
4.
अन्तिम
सम्मेलन।
लेखक ने लगभग
75 साल पहले जिस शिक्षण- कला के बारे में अपना चिन्तन एक शिक्षक की संघर्ष
कथा के रूप में प्रस्तुत किया था, वह आज के शिक्षण की अनिवार्यता हो गई है।
अध्यापक की उदासीन मानसिकता को बच्चे किस प्रकार सहन किया करते थे उसे लेखक
ने महसूस किया है एवं उसका व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया है। लेखक
परम्परागत शिक्षण के ढाँचे के पक्ष में नहीं है। वह उसमें आमूल-चूल
परिवर्तन का हामी है। वह अनेक प्रयोग करता है। किस प्रकार खेल-खेल में
शिक्षा दी जाए,
कैसे
कहानी के माध्यम से बच्चों के लेखन,
श्रवण,
वाचन
आदि क्रिया-कलाप का विकास हो तथा बच्चों को पाठ्यक्रम के अलावा अन्य
शिक्षण में निपुण किया जाए,
कैसे
उनकी उत्सुकता का निराकरण किया जाए।
अध्यापक
लक्ष्मीशंकर ने बहुत ही साहस का कार्य किया; जबकि उस समय उनके साथी उनकी शिक्षण-कला का मज़ाक उड़ाया करते थे
कि बच्चों को खेल खिलाकर कहानी सुनाकर बरबाद कर रहे हैं। इस सोच के पीछे उस
समय ऐसी ही धारणा थी क्योंकि उस समय परम्परागत शिक्षण से हटकर नवीन विधि को
लागू करने का जोखिम मोल लेने में असफल हो जाने का डर भी था। बच्चों को केवल
डण्डे के बल पर पढ़ाया जा सकता है,
यह
गलत धारणा बनी हुई थी। ऐसे में लक्ष्मीशंकर का स्थान-स्थान पर अध्यापक
साथियों ने खूब मज़ाक उड़ाया,
लेकिन
वे विचलित नहीं हुए। परिणाम उसी समय दिखाई देने लगे थे। डायरेक्टर साहब ने
लक्ष्मीशंकर जी को खूब सहयोग दिया।
शिक्षक ने
प्रत्येक विषय को क्रियाकलाप के माध्यम से पढ़ाया। मनोवैज्ञानिक ढंग से
अध्ययन एवं विश्लेषण करके पता लगाया कि किस विद्यार्थी की किस कार्य में
रुचि है। छात्र को केन्द्र में रखकर परीक्षा में आमूल चूल परिवर्तन किये।
लेखक का मानना है कि कुछ बच्चों को पुरस्कृत करके कुण्ठा एवं अभिमान की
भावना का ही प्रसार होता है। गिजू भाई की सुझाई गई नई प्रणाली आशाओं से भरे
मधुर सपनों को साकार करती है। यह पुस्तक शिक्षक वर्ग के लिए एक उत्प्रेरक
का काम करती है और नई से नई पद्धति के अपनाने पर बल देती है। |
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