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| 02.16.2009 |
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तुर्रम
(बाल उपन्यास) : लेखक - कमलेश भट्ट
‘कमल'
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तुर्रम (बाल उपन्यास) : लेखक - कमलेश भट्ट
‘कमल'
प्रकाशक
:
आत्मा राम एण्ड संस नई दिल्ली
प्रथम
संस्करण
:
2006 ,
मूल्य
:
80
रुपए (सजिल्द)
पृष्ठ
संख्या
:
47
प्रस्तुत
लघु उपन्यास तुर्रम में श्री कमलेश भट्ट
‘कमल'
ने
बाल सुलभ मन के चित्र बहुत सहजता से उकेरे हैं। पढ़ते समय ऐसा लगा कि मेरा
बचपन पुन: लौट आया है।
बच्चे वास्तव में मन के सच्चे होते हैं। वे जिसे प्यार करते हैं पूरे मन से
प्यार करते हैं। इस उपन्यास का मुख्य पात्र विनीत,
तुर्रम नाम के मेंढक से बेहद प्यार करने लगता है। लेखक ने इसका सजीव चित्रण
किया है कि बच्चा किस तरह धीरे-धीरे
तुर्रम से अपने को जोड़ता है। वह जब तक उसके क्रिया-कलाप
देख नहीं लेता तब तक उसे सुकून नहीं आता। लेखक ने बच्चे के लगाव एवं तुर्रम
की हर गतिविधि का सूक्ष्म चित्रण किया है।
हर जीव को
पालने के पीछे कुछ फायदे भी होते हैं। जैसे मेंढक मच्छर,
कीड़े-मकौड़ों को खा जाता है। इस प्रकार मच्छर वातावरण को कीड़े-मकौड़ों से
रहित बनाता है। लेखक ने बहुत बारीकी से मेंढक की गतिविधियों का अवलोकन किया
होगा तभी चित्रण में इतनी सहजता आ सकी है। इस उपन्यास को पढ़कर सबसे पहला
विचार यही उभरता है कि हमें जीव-जन्तुओं से प्यार करना चाहिए। जीव-जन्तु
किस प्रकार अपने आप को सुरक्षित रखकर स्वतंत्र जीवन जीते हैं। जीव-जन्तु
किसी प्रतिबन्ध में रहना पसन्द नहीं करते। घर आने वाले प्रत्येक मेहमान को
भी तुर्रम से परिचित कराया जाता है। लेखक ने अन्त में भी बड़ा सुन्दर चित्रण किया है कि जीव-जन्तु भी अपने साथियों के साथ रहना पसन्द करते हैं न कि किसी प्रतिबन्ध में रहना। साज-सज्जा की दृष्टि से यह बाल उपन्यास उत्तम है। मूल्य अधिक है कुछ कम होता तो अच्छा होता। |
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