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| 03.19.2008 |
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बदलाव |
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बाबूजी
रोज की तरह आज भी सुबह टहलने निकले । थोड़ा दूर चलने पर चौराहा आने पर
सुस्ताने के लिए एक तरफ खड़े हो गए । तेज गति से आते
–
जाते हुए
वाहनों को देखकर सोचने लगे:–
“दुनिया
कितनी बदल गई है। कल और आज में कितना अन्तर आ गया है।”
कर रर
–
र–र–––
च
“अरे
कोई बिचारा टकरा गया”,
सोचते हुए बाबूजी उस ओर बढ़े। देखा तो एक कार कुछ दूरी पर खड़ी थी और सड़क
पर लहूलुहान पड़ा था एक होमगार्ड का जवान। चौराहे पर तैनात पुलिसवाला कार
के मालिक से कह रहा था,
“अरे
साहिब बीस हजार दे दो,
आपकी गाड़ी से नहीं टकराया यह”
।
कार का
मालिक फुर्ती से नीचे उतरा,
पुलिसवाले से कुछ और बात हुई और कार तेजी से निकल गई ।
चौराहे पर
तैनात सिपाही से बाबूजी बोले,
“अरे
भई मरने वाला तो तुम्हारी ही बिरादरी का था,
तब
भी !!”
“बाबूजी,
किस ज़माने की बात करते हैं ! इस लाश पर तो शाम तक एक लाख की वसूली हो
जाएगी।”
सिपाही के
इस उत्तर से बाबूजी स्तब्ध रह गए और सोचने लगे:– “वाकई दुनिया कितनी बदल गई है।” कल और आज में.........। |
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