अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
01.26.2008
 

उम्मीद
सुभाष चौधरी


उम्मीद का बुलबुला
आसमान में झूलते
गुब्बारे की तरह
एक दिन
फूट ही जाता है
तो कैसे करूँ उम्मीद
आसमानी छत की
सफेद फर्श की
और उसकी
जो कभी मेरी न थी।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें