उम्मीद सुभाष चौधरी
उम्मीद का बुलबुला आसमान में झूलते गुब्बारे की तरह एक दिन फूट ही जाता है तो कैसे करूँ उम्मीद आसमानी छत की सफेद फर्श की और उसकी जो कभी मेरी न थी।