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01.26.2008
 

मौत 1
सुभाष चौधरी


सहज मरने के लिए पैदा हुआ होता
तो उसी दिन मर गया होता
जिस दिन पैदा हुआ था...
             मगर उम्मीदें, आशाएँ, आकांक्षाएँ,
                    मेरे अपनों की
                          मेरे साथ थीं
मगर रेत की दीवार की तरह
सब कुछ ढह गया...
सोचता हूँ उसी दिन ही
क्यों न मर गया....


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