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ISSN 2292-9754

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02.10.2016


कुछ तो बोल

इस पूरे वाक़या को समझने के लिए उस जगह को समझना ज़रूरी है जहाँ से इसका ताल्लुक़ है। मेरी सोसाइटी के गेट के सामने जो दुतरफ़ा सड़क है, उसमें इधर से जाने वाली सड़क का अंत और उधर से आने वाली सड़क की शुरूआत कोई बीस-पच्चीस गज दूर उस टी-पॉइन्ट से होती है जहाँ से एक सड़क दायीं तरफ़ और दूसरी बायीं तरफ जाती है। इधर से उधर जाने वालों को वापस आने के लिए टी-पॉइन्ट से यू-टर्न लेना पड़ता है। उस दिन सड़क पार कर रहा था तो मेरी नज़र ठीक मेरे सामने से गुज़रते उस बाइक सवार पर पड़ी जिसके एक हाथ में बाइक का हैंडल था और दूसरे हाथ में वह मोबाइल था जिससे वह किसी से बात कर रहा था। मैं जब तक सड़क के दूसरी तरफ वाले बस स्टैंड पर पहुँचा, उस बाइक सवार को टी-पॉइन्ट पर दायीं ओर से तेज़ी से आते एक ट्रक ने अपनी चपेट में ले लिया। मिनटों में वहां पर लोग इकट्ठा हो गए और मैं भी तेज़ी से उधर लपका। अचानक मेरी नज़र उसके मोबाइल पर पड़ी जो छिटक कर पास के कूड़े के ढेर पर जा गिरा था। लोग बाइक को और उसे उठा रहे थे और मैंने मोबाइल उठाकर अपने कान पर लगाया। उधर से आवाज़ आयी, "अरे कुछ तो बोल। तू दस मिनट में नहीं मिला तो…" मैं तुरंत भीड़ को चीरता हुआ उस आदमी के पास पहुँचा तो पता चला कि वह तो मर चुका है। मैंने उसका मोबाइल चुपचाप उसके मृत शरीर के पास रख दिया और पुलिस के पहुँचते ही वहाँ से चल दिया।


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