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ISSN 2292-9754

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02.18.2016


संप्रेषण का एक आसान माध्यम: ब्लॉगिंग

सूचना औद्योगिकी का नवीनतम योगदान इंटरनेट है। भूमंडलीकरण की प्रक्रिया में दुनिया बहुत तेज़ी से सिकुड़ती और पास आती जा रही है। वैश्विक ग्राम की अवधारणा के पीछे-सूचना क्रान्ति की शक्ति है। 21वीं सदी में इंटरनेट एक ऐसे महत्वपूर्ण हथियार के रूप में उभरा है, जहाँ अभिव्यक्ति के तौर-तरीक़े बदलते नज़र आ रहे हैं। आधुनिक युग में इंटरनेट एक ऐसा माध्यम है, जहाँ साहित्य बहुतायत में उपलब्ध किया जा सकता है। इस तकनीकी युग में इंटरनेट पर कई वेबसाइट्स उपलब्ध हैं जिससे जुड़कर नेट पर साहित्य रचा जा सकता है। ब्लॉग ऐसी ही एक वेबसाइट है। इंटरनेट की उपलब्धि से उपजे ब्लॉग ने रचनात्मकता की अपार संभावनाओं को स्पष्ट किया है। ब्लॉग को इंटरनेट पर लिखी डायरी के तौर पर समझा जा सकता है, लेकिन फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि इस डायरी में कुछ भी लिखा जाए चाहे साहित्य हो या साहित्येतर उसे कोई भी पढ़ सकता है।

विश्व की कई भाषाओं में ब्लॉग लिखा जा रहा है। हिन्दी भाषा में लिखे गये ब्लॉग्स् में ज़्यादातर साहित्य के पृष्ठ पाये जाते हैं। साहित्य की हर विधा ब्लॉग पर पढ़ने को मिलती है। साहित्य के अलावा अन्य कई सूचनाएँ, जानकारियाँ आदि भी ब्लॉग से मिल जाती हैं। देखा जाए तो ब्लॉग द्वारा हमें सभी प्रकार की जानकारियाँ मिल सकती हैं। आज सरकारी और गैर-सरकारी लोगों समेत आम आदमी भी ब्लॉग से जुड़ने लगा है। इस प्रकार ब्लॉग विचाराभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में उभरा है। ब्लॉग के ज़रिये ब्लॉगर समाज के हर मुद्दे पर अपना विचार रख सकता है। इसके लिए ब्लॉगर को किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं लेनी पड़ती है। राजनीति, सिनेमा, मनोरंजन आदि से जुड़े ब्लॉग के माध्यम से इनके बारे में अप-टू-डेट रह सकते हैं। सभी क्षेत्रों में ब्लॉगिंग की भूमिका को देखा जा सकता है। विद्यार्थी से लेकर अध्यापक तक, राजनितिज्ञ से लेकर कलाकारों तक सभी ब्लॉगिंग से जुड़े हुए हैं। सोशल मीडिया में ट्विटर और फेसबुक के बाद ब्लॉगिंग एक लोकप्रिय संचार का माध्यम बन गया है।

ब्लॉग पर हिंदी साहित्य की भरमार है। आज कई प्रसिद्ध साहित्यकार इससे जुड़े हुए हैं। वे लगातार हिंदी में साहित्यिक सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। ब्लॉग पर लगभग प्रत्येक विधा का साहित्य उपलब्ध है, पर यहाँ कविता और कहानी के साथ-साथ तत्कालीन साहित्यिक जानकारी के ब्लॉग अधिक हैं। इन ब्लॉग्स के माध्यम से भिन्न-भिन्न साहित्यिक रचनाओं की समीक्षाओं को पढ़ा जा सकता है। साहित्यकार ब्लॉगिंग के माध्यम से अपनी रचना को बिना किसी रुकावट या काँट-छाँट के दूसरे तक पहुँचा सकता है। इससे साहित्यकार पूरी तरह आत्मनिर्भर होकर सृजन कर सकता है, क्योंकि वह यहाँ ख़ुद ही लेखक और प्रकाशक होता है। भौगोलिक सीमाओं से बाहर ब्लॉगिंग के ज़रिये ब्लॉगर निजी विचारों को पूरी दुनिया तक पहुँचा सकता है। इस प्रकार ब्लॉग के माध्यम से हिन्दी की प्रचार-प्रसार में वृद्धि हुई है।

हिन्दी ब्लॉगिंग ने नए लेखकों को पाठक के सामने लाया है। आज ब्लॉगिंग करते हुए कई साहित्यकारों ने अपनी एक पहचान बना ली है। हिन्दी साहित्य के कई प्रसिद्ध साहित्यकारों ने ब्लॉग को अपनी रचना कर्म के श्रेष्ठ माध्यम के रूप में बताया है। ब्लॉगिंग से पैसे कमाने का भी सु-अवसर मिल सकता है। साहित्य की रचना प्रक्रिया पर ध्यान दिया गया तो ब्लॉग में ज़्यादातर कविता, लघु कहानियाँ प्रकाशित की जाती हैं। आरंभिक दौर में हिन्दी में टाइपिंग (टंकण) करने की असुविधा के कारण हिन्दी में ब्लॉगिंग करना एक समस्या थी, पर आज इस तकनीकी समस्या का समाधान हो चुका है। इंटरनेट पर हिन्दी भाषा के कई फॉन्ट उपलब्ध हैं, जिससे नेट पर हिन्दी आसानी से लिखी जा सकती है। हिन्दी में कई ब्लॉग संकलक को देखा जा सकता है, जो ब्लॉगिंग करने में सहायता करते हैं। नेट पर कई व्यक्तिगत और सामूहिक ब्लॉग देखे जा सकते हैं।

यदि अनेक व्यक्ति मिलकर किसी ब्लॉग को चला रहे हैं तो वह सामूहिक ब्लॉग कहलाता है। इसमें कई ब्लॉगर एक साथ अपने लेख प्रकाशित करते हैं, जिससे पाठक वर्ग को एक साथ कई विषयों की जानकारी मिलती है। सामूहिक ब्लॉग में एक मॉडरेटर होता है, जिसकी अनुमति से अन्य ब्लॉगर अपना ब्लॉग पोस्ट कर सकते हैं। सामूहिक ब्लॉग के रूप में ‘नारद’, ‘अक्षरग्राम नेटवर्क’, ‘चिट्ठाजगत.इन’, ‘तरकश.कॉम’, ‘परिकल्पना.कॉम’, ‘ब्लॉगसेतु’, ‘सर्वज्ञ विकि’, ‘हमारीवाणी’, ‘ब्लॉगप्रहरी’ आदि इंटरनेट पर मिलते हैं।

सामूहिक ब्लॉग के अतिरिक्त इंटरनेट पर कई वेबसाइटस् के बारे में पता चलता है जो साहित्य के लिए एक मुक्त मंच प्रदान करते हैं। हिन्दी साहित्य के लिए इंटरनेट पर कविताकोश, गद्यकोश आदि ऐसे ही वेबसाइट हैं। इन्हें हम ब्लॉग के अतंर्गत देख सकते हैं। इन वेबसाइटस् में तमाम पुराने और नवोदित रचनाकारों की रचनाओं को पढ़ा जा सकता है। कविता कोश के संस्थापक और प्रकाशक ‘ललित कुमार’ हैं। इस साइट से हिन्दी कविताओं को पढ़ा जा सकता है। इंटरनेट पर ‘हिन्दी समय.कॉम’, ‘हिन्दी कुंज’, ‘हिन्दी साहित्य’, ‘वटवृक्ष’, ‘रचनाकार.कॉम’, अभिव्यक्ति.कॉम, साहित्य कुंज.नेट आदि ऐसे समूह हैं जिससे हिन्दी के व्यापक प्रसार को देखा जा सकता है।

‘Msn’, ‘Google’, ‘Yahoo’ आदि वेबसाइट पर कई हिन्दी समूह पाये जाते हैं जिससे जुड़कर हिन्दी साहित्य चर्चा में भाग ले सकते हैं। ‘हिन्दी समूह’, ‘हिन्दी फोरम’, ‘हिन्दी कविता संग्रह’, ‘चिट्ठाकार’, ‘गाथा’ आदि कुछ ऐसे समूह के उदाहरण हैं। इन समूहों से जुड़कर रचनाकार अपनी रचनात्मकता को नए आयाम दे सकते हैं।

व्यक्तिगत ब्लॉग पर बात करें तो ‘व्यक्तिगत ब्लॉग’ का अर्थ है कि किसी एक व्यक्ति द्वारा बनाया गया ब्लॉग। इसमें ब्लॉगर ख़ुद लेखक और प्रकाशक होता है। ब्लॉगर के द्वारा पोस्ट किये गये लेख को पाठक पढ़कर उसपर अपनी राय दे सकते हैं। वर्तमान समय में हिन्दी के प्रमुख ब्लॉगरों में रवीशकुमार का ‘कस्बा’, अनुप शुक्ल के ‘फूरसतिया’, रविशंकर श्रीवास्तव के ‘छीटें और बौंछार’, आकांक्षा यादव के ‘शब्द शिखर’, अरविंद श्रीवास्तव के ‘जन संवाद’, अविनाश वाचस्पति के ‘नुक्कड़’, आलोक कुमार के ‘नौ-दो-ग्यारह’, यशवंत सिंह की ‘भड़ास’, समीरलाल के ‘उड़नतश्तरी’, युनुस़ ख़ान के ‘रेडियो वाणी’, प्रभात रंजन का ‘जानकी पूल’, सिद्धेश्वर सिंह के ‘कर्मनाशा’, जीतु चौधरी के ‘मेरा पन्ना’ इत्यादि। इसके अतिरिक्त तमाम व्यक्तिगत ब्लॉग्स् इंटरनेट पर उपलब्ध हैं।

व्यक्तिगत ब्लॉगर के रूप में साहित्यकार अपनी रचनाओं को ब्लॉग में प्रकाशित करता है। इस प्रकार उसे पाठकों से अपनी कृति की खूबियाँ और कमियाँ बहुत जल्द ही पता चल जाती हैं। उसे बहुत दिन तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती है, और अगर लेखक या ब्लॉगर द्वारा रची गयी कृति अच्छी हो तो भविष्य में उन कृतियों को पुस्तक का रूप मिल सकता है। ब्लॉगिंग का दायरा दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। ई मेल और फेसबुक के खाते की तरह ही ब्लॉग बनने लगा है। इस तकनीकी युग में इलोक्ट्रोमीडिया ने साहित्य को एक नया स्वरूप प्रदान किया है। आदिकाल से जो साहित्य ताम्रपत्र और कागज़ों में लिखा जाता था वह अब इंटरनेट पर लिखा जाने लगा है। अब लेखक को अपनी रचना को प्रकाशित करने के लिए इंतज़ार नहीं करना पड़ता है। इस प्रकार साहित्यकार अपनी सृजन शक्ति को ब्लॉग के माध्यम से एक विशेष पहचान दे सकता है। इसके लिए सिर्फ उसे नियमित रूप से ब्लॉग लिखने की आवश्यकता है। ब्लॉग्स् संचार और संप्रेषण के नए साधनों का एक समुच्चय है। ब्लॉग के कारण ही अब पाठक और लेखक के बीच दूरियाँ खत्म हो गई हैं। ब्लॉग्स् के पाठक पूरी दूनिया से मिलते हैं। ब्लॉग के द्वारा हम किसी भी विषय में, विश्व की किसी भी भाषा में, अपने विचार प्रकट कर सकते हैं, जो इंटरनेट में लोगों के पढ़ने हेतु हमेशा उपलब्ध रहेगा। ब्लॉग में लेखक अपने मन की बातें लिखकर स्वंय प्रकाशित करता है। यह अब अभिव्यक्ति का सर्वश्रेष्ठ माध्यम बन गया है।

स्मृतिरेखा नायक
E.mail- smruti032@gmail.com


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