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05.17.2012


 सम्मान 

माफ़ कीजिए!
मैं न दे सका तुम्हें
वह सम्मान
जिसके तुम नहीं थे अधिकारी
मैंने कोशिश की
बनाने की तुम्हें उसके योग्य
पर तुम
चाहते रहे उसे प्राप्त करना
बिना बने अधिकारी उसके
बनना चाहा भी नहीं
और न होने पर ये सब
तुमने उल्टे छीन लिया मुझसे ही
मेरा वो हक़
अधिकारी था जिसका मैं
तुम्हीं बताओ
कैसे दे दूँ मैं
सम्मान वह तुम्हें
जिसके तुम नहीं अधिकारी
और यदि मैं
दे देता हूँ तुम्हें वह सब
जिसके नहीं हो अधिकारी तुम नितांत
तो
ऐसा सम्मान देने वाले इस
दो कौड़ी के आदमी के
सम्मान को पाकर
भला क्या करोगे तुम?


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