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05.03.2012
 
प्रेमगीत
श्यामल सुमन

मिलन में नैन सजल होते क्यों, विरह में जलती आग।
प्रियतम! प्रेम है दीपक राग।।

आए पतंगा, बिना बुलाए, कैसे दीप के पास।
क्या चिंता, परिणाम की उसको, पिया मिलन की आस।
जिद है मिलकर, मिट जाने की, यह कैसा अनुराग।।
प्रियतम! प्रेम है दीपक राग।।

मीठे स्वर का, मोल तभी तक, संग बजाते हों साज।
वीणा की वाणी होती क्या, तबले में आवाज़।
सुर सजते जब, चोट हो तन पे, और हृदय पर दाग।।
प्रियतम! प्रेम है दीपक राग।।

देखे चाँद को, रोज चकोरी, क्या बुझती है प्यास।
कमल खिले, निकले जब सूरज, होते अस्त उदास।
हँसे कुमुदिनी, चंदा के संग, रोये सुमन का बाग़।।
प्रियतम! प्रेम है दीपक राग।।
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