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01.16.2009
 
प्रतीति
श्यामल सुमन

 गीत वही और राग वही है,
वही सुर सब साज वही है,
गाने का अंदाज वही पर,
गायक ही बस बदल गये हैं।

लोग वही और देश वही है,
नाम नया परिवेश वही है,
वही तंत्र का मंत्र अभी तक,
शासक ही बस बदल गये हैं।

शिष्य वही और ज्ञान वही है,
तेजस्वी का मान वही है,
ज्ञान स्वार्थ से लिपट गया
क्यों?
शिक्षक भी तो बदल गये हैं।

धर्म वही और ध्यान वही है,
वही सुमन भगवान वही है,
जो है अधर्मी मौज उसी की,
क्या जगपालक भी बदल गये हैं?
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