अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
05.03.2012
 
नारी
श्यामल सुमन


रूप तेरे हजार तू सृजन का आधार।
माँ की ममता है तुझमें बहन का भी प्यार।।

बन के शक्ति - स्वरूपा किया है जो काम।
फिर भी अबला जगत ने दिया तुझको नाम।
तेरी करूणा अपार तू है सबला साकार।
चेतना भी हृदय की हो प्रियतम - श्रृंगार।।

कभी नाजों पली बेवजह भी जली।
तू कदम से कदम तो मिलाकर चली।
रूक कर तू विचार न हो जीवन बाजार।
चंद सिक्कों की खातिर न तन को ऊघार।।

त्याग-शांति की मूरत हो धीरज की खान।
करे सम्मान नारी का वो है महान।
नित कर तू सुधार नहीं बन लाचार।
बढे बगिया की खुशबू सुमन का निखार।।

रूप तेरे हजार तू सृजन का आधार।
माँ की ममता है तुझमें बहन का भी प्यार।।
अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें