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ISSN 2292-9754

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08.27.2016

कामना
श्यामल सुमन


नव किरणें मुस्काकर लायीं नये वर्ष का नव पैगाम।
कोयल कूक रही है जग में गूँजेगा भारत का नाम।।

वही आसमां वही फ़िज़ा है वही दिशाएँ अभी तलक।
नयी चेतना नये जोश से नया सृजन होगा अविराम।।

बहुत रो लिये वर्तमान पर परिवर्तन की हो कोशिश।
सार्थक होगा तब विचार जब हालातों पर लगे लगाम।।

पिंजड़े के तोते भी रट के बातें अच्छी कर लेते।
बस बातों से बात न बनती करना होगा मिलकर काम।।

नित नूतन संकल्पों से नव सोच की धारा फूटेगी।
पत्थर पे भी सुमन खिलेंगे और होगा उपवन अभिराम।।
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