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ISSN 2292-9754

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08.27.2016

गिरगिट
श्यामल सुमन

होली हम भी मनाते हैं
और हमारे रहनुमा भी मनाते हैं।
लेकिन दोनों के होली में फर्क है
जिसके लिए  प्रस्तुत यह तर्क है।।
 

सब जानते हैं
कि होली रंगों का त्योहार है।
एक दूसरे के चेहरे पर
रंग लगाने का व्यवहार है।
रंगों में असली चेहरा
कुछ देर के लिए छुप जाता है।
पर अफसोस ऐसा दिन हमारे लिए
साल में बस एकबार ही आता है।।

लेकिन हमारे रहनुमा
पूरे साल होली मनाते हैं।
बिना रंग लगाये सिर्फ रंग बदलकर
अपना असली चेहरा छुपाते हैं।।

देखकर इन रहनुमाओं की
रंग बदलने की रफ्तार।
गिरगिटों में छायी बेकारी
और वे करने लगे आत्महत्या लगातार।।

 

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