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ISSN 2292-9754

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08.27.2016

चाहत
श्यामल सुमन

लगे चुराने सपन हमारे, सुनहरे सपने सजाये रखना।
कभी तीरगी खतम तो होगी, चराग़ दिल में जलाये रखना।।

खोज रहा हूँ बाज़ारों में, वो आशियाँ जो कभी था मेरा।
फिर से इक अपना घर होगा, इसी आस को जगाये रखना।।

मजहब के रखवालों ने मिल, लूट लिया है इन्सानों को।
वर्षों हमने झुकाया सर को, आज ज़रूरी उठाये रखना।।

नहीं शेष अब सहनशीलता, हृदय में शोले सुलग रहे हैं।
मिलें हाथ आपस में तबतक, उन शोलों को दबाये रखना।।

कई तरह की आग लगी है, हमें बचाना है उपवन को।
सभी सुमन के मान बराबर, ऐसी चाहत बचाये रखना।।
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