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12.26.2008
 

नेकी
श्याम कोरी 'उदय'


नेकी, कौन-सी नेकी,
शायद वही तो नहीं,
जिसे लोग कहते हैँ ,
नेकी कर दरिया में डाल,

आज के समय में नेकी,
किसके लिये नेकी,
शायद उनके लिये,
जिन्हें नेकी का मतलब पता नहीं,

या फिर उनके लिये,
जिन्हें रूरत तो है,
पर जिनकी नज़रें बदल चुकी हैं,

अब नेकी करने वाले,
'ख़ुदा के बन्दों' को भी,
मतलबी समझने लगे हैं लोग,

नेकी, अब छोड़ो भी नेकी,
अब वो समय नहीं रहा,
जब नेकी करने वालों को ,
'ख़ुदा का बन्दा' कहा करते थे लोग,

अब रूरत मन्दों की,
ज़रें बदल रही हैँ,
रूरत तो है,
सामने ख़ुदा का बन्दा भी है,

पर क्या करेँ,
हालात ही कुछ से हैं,
देखने वालों को ,
ख़ुदा के बन्दे भी ,
मतलबी दिख रहे हैँ,

अब समय नहीं रहा,
नेकी करने का,
दरिया में डालने का,
लोग अब नेकी करने का मतलब,
कुछ और ही समझने लगे हैं,
सामने 'ख़ुदा का बन्दा' तो क्या,
ख़ुद "ख़ुदा" भी आ जाये,
तब भी . . . . . . . . . . . . . . ।


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