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06.08.2008
 

नक्सली समस्या
श्याम कोरी 'उदय'


नक्सली, कौन है नक्सली,
नक्सली समस्या आखिर क्या है,
और कौन है इसके जन्मदाता,
और कौन चाहते है इसकी रोकथाम।

रोकथाम के लिए कौन काम कर रहा है,
नक्सली उन्मूलन के लिए कौन दम भर रहा है,
क्या मात्र दम भरने से उन्मूलन हो जायगा,
या बरसों से दम भर रहे लोगो के साथ,
कुछ एक का नाम और जुड़ जायगा,
नक्सली उन्मूलन के लिए उठाए गए कदम,
क्या कारगर नहीं थे,
कारगर थे तो फिर उन्मूलन क्यों न हुआ,
क्यों कदम उठ -उठ कर लड़खडा गए,
दम भरने वाले कमज़ोर थे,
या उठाए गए कदम,
या फिर हौसला ही कमज़ोर था,

समय-समय पर नए-नए उपाय,
और फिर वही ठंडा बस्ता,
आखिर उपायों के कब तक ठंडे बसते बनते रहेंगे,
कब तक माथे पर चिंता की लकीरें पढ़ती रहेंगी,
कब तक नक्सलियों के हौसले बढ़ते रहेंगे,
कब तक भोले भाले लालसलाम कहते रहेंगे,
लालसलाम -लालसलाम के नारे कब तक गूँजते रहेंगे,
एयरकंडीशन कमरों -गाड़ियों में बैठने वाले,
एयरकंडीशन उड़न खटोलो में उड़ने वाले,
क्या नक्सली समस्या का समाधान खोज पाएँगे,
क्या लाल सलाम को बाय-बाय कह पाएँगे,
एयरकंडीशन में रचते बसते लोग,
तपती धरती की समस्या को समझ पाएँगे,
सीधी-सादी सड़कों पर दौड़ते लोग,
ऊबड़ खाबड़ पग डंडियों पर चलने के रास्ते बना पाएँगे,
सरसराहट से सहम जाने वाले लोग,
क्या नक्सली खौफ को मिटा पाएँगे,
या फिर नक्सली उन्मूलन का दम ......;
क्या हम नक्सली समस्या समझ गए है,
क्या हम इसके समाधानों तक पहुँच गए है,
क्या हम सही उपाय कर पा रहे है,
शायद नहीं .......................आखिर क्यों ?

क्योकि तपती धरती, ऊबड़ खाबड़ पग डंडियों,
में रचने बसने वालों के सुझाव कहाँ है,
कौन सुन -समझ रहा है उनकी,
कौन आगे है -कौन पीछे है,
एयर कंडीशन ...................तपती धरती,
................और नक्सली समस्या ?

साथ ही साथ यह प्रशन उठता है,
की नक्सली चाहते क्या है,
क्या वे लक्ष्य के अनुरूप काम कर रहे हैं,
या फिर सिर्फ मार- काट ...............
........लूटपाट .......बारुदी सुरंगें .
ही नक्सलियों का मकसद है ?


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