अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
06.07.2008
 

चाँदी के सिक्के
श्याम कोरी 'उदय'


दोस्तो क्यों परेशान होते हो,
क्यों हैरान होते हो,
चाँदी के चंद सिक्कों के लिए,
ज़रा सोचो,
चाँदी के सिक्कों का करोगे क्या,
क्या इन सिक्कों से नींद आ जाएगी,
या फिर इनसे,
रात की करवटें रुक जायेंगी,
और तो और, क्या कोई बतायेगा,
कि इन सिक्कों को देख कर,
क्या 'यमदूत' डर कर लौट जायेंगे,
या फिर, इन सिक्कों पर बैठ कर,
तुम स्वर्ग चले जाओगे,
या इन्हें जेब में रख कर,
अजर-अमर हो जाओगे,
अगर तुम सोचते हो,
ऐसा कुछ हो सकता है,
तो चाँदी के सिक्के अच्छे हैं,
और तुम्हारी इनके लिए मारामारी अच्छी है,
अगर ऐसा कुछ न हो सके,
तो तुम से तो,
तुम्हारे चाँदी के सिक्के अच्छे हैं,
तुम रहो, या न रहो,
ये सिक्के तो रहेंगे,
न तो तुम्हारे अपने और न ही ये सिक्के,
तुम्हें याद करेंगे,
अगर ऐसा हुआ या होगा!
फिर ज़रा सोचो,
क्यों परेशान होते हो,
चाँदी के चंद सिक्कों के लिए,
अगर होना ही है परेशान,
रहना ही है जीवन भर हलकान,
तो उन कदमों के लिए हो,
जो कदम उठें तो,
पर उठ कर बस कदम ही न रहें,
बन जायें रास्ते, सदा के लिए,
न सिर्फ तुम्हारे लिए,
न सिर्फ हमारे लिए...


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें