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ISSN 2292-9754

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12.17.2014


शाम

उदास नहीं पर भीगी है शाम
कुछ गुमसुम कुछ गुनगुन है शाम
सुरमयी हुई घूँघट में छुपने को है शाम

चिड़ियों के कोलाहल में खिलखिलाती शाम
चाँद के आगमन की आहट सुनाती ख़ामोश शाम
अनजाना सा दर्द बढ़ाती मद्धम-मद्धम ये सुहानी शाम

लाली ओढ़ नीली चादर बिछाती ये शाम
सर्द हवाओं में लिपटी गुनगुनी धूप से दामन छुड़ाती शाम
नीली नदी की एक छोर से हाथ हिला अलविदा कहती ये शाम


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