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ISSN 2292-9754

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03.06.2016


पिता

पिता कभी कहीं नहीं जाते।
उनकी देह अवसान की
नैसर्गिक प्रक्रिया के लिए बाध्य है।
जो हमारी स्मृतियों में विलीन होकर,
कहीं हमें उनके और निकट पहुँचा देती है।
इसलिए वे हमेशा के लिए
हमारे पास स्थायी हो जाते हैं।
जो अब कभी कहीं नहीं जाएँगे।
सार्थक और सफल जीवन के
हस्ताक्षर पिता।
चिरनिद्रा में लीन संतोष के
छायाचित्र पिता।
हमारे अवचेतन में स्थिर चित्र बने
अदृश्य मार्गदर्शक पिता।
सिर पर सदैव आशीर्वाद के
स्पर्श पिता।
हमारे आसपास ही कहीं होने की
अनुभूति पिता।


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