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ISSN 2292-9754

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08.25.2017


निष्कर्तव्य

जब भी रोना
समंदर के पास रोना,
वो तुम्हारा दर्द
ख़ुद में समा लेगा,
क्योंकि दुनिया का बस चले
तो तुम्हारे
दर्द का भी सौदा कर देगी,

माफ़ी माँगने से अगर
पाप कम होते तो
स्वर्ग और नर्क का
प्रपंच नहीं होता,
ये सहारा भी बुज़दिलों का है
जिनसे कुछ नहीं होता
वो ही कहते है हाथ में हाथ धरकर
ईश्वर है अब वही न्याय करेगा।


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