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ISSN 2292-9754

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08.25.2017


मछलियाँ

मछलियाँ अनगिनत तैर रहीं है जल में
उसी एक जल में इधर से उधर घूमती हुई
दाने खाने में लगी हुई,
जैसे औरतें टहलती हैं एक ही घर में,
दाने पानी के इंतज़ाम में लगी हुई।

एक औरत दूसरी लड़की को
औरत बनते ही दे देती है
वो सब ज्ञान जो उसने पाया है।
किसी और औरत से औरत बनने के लिए,
ये ठीक वैसा ही नहीं लगता जैसे
निगल जाती है
बड़ी मछली छोटी मछली को॥


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