जन सामान्य के लिए
जन सामान्य के द्वारा
और जन सामान्य का
तंत्र है---
किन्तु आश्चर्य---
सर्वाधिक उपेक्षित
जन सामान्य ही है
हर बार चुनाव में
वही निशाना बनता है
कोई डराता है-
कोई फुसलाता है
कोई ललचाता है
पर--
सत्ता मिलते ही
अगूँठा दिखाता है
बेचारा जन सामान्य
मुँह ताकता रह जाता है
हर शासक उसी के लिए
योजनाएँ बनाता है
बड़ी-बड़ी कसमें खाता है
ये और बात है कि
लाभ भाई-भतीजा
ही पाता है
बेचारा जन सामान्य
सोचता ही रह जाता है
आख़िर कब तक वह
यूँ भ्रम में जिएगा?
सत्ता लोलुप
लालची लोगों का
शिकार होता रहेगा?
जिसके लिए यह तंत्र है
उसी को मिटाया जाता है
कुचला और सताया जाता है
हर बार उसे ही
शिकार बनाया जाता है
कभी उसे --
गोली लगती है
कभी रौंदा जाता है
कभी कुचला जाता है
किन्तु फिर भी
गर्व से मुस्कुराता है
और हँसकर
गुनगुनाता है
यह लोकतंत्र है
मेरे लिए--
मेरे द्वारा-- और
मेरा
तंत्र---
कभी तो कोई
चमत्कार हो जाए
और लोकतंत्र
जन-जन का
तंत्र हो जाए